Om Jai Shiv Omkara

ॐ जय शिव ओंकारा आरती | Om Jai Shiv Omkara | शिव जी की आरती ॐ जय शिव ओंकारा भगवान शिव को समर्पित अत्यंत लोकप्रिय एवं भक्तिमय आरती है। इस आरती में भगवान शिव के दिव्य स्वरूप, उनकी अनंत शक्ति, त्रिमूर्ति स्वरूप, करुणा और जगत के पालन एवं संहारकर्ता रूप का गुणगान किया गया है। भक्तजन इस आरती का पाठ अथवा गायन भगवान शिव की पूजा, सोमवार, सावन, महाशिवरात्रि तथा अन्य शुभ अवसरों पर श्रद्धापूर्वक करते हैं। आरती के समय दीपक प्रज्वलित करके भगवान शिव के समक्ष आरती करना भक्ति और समर्पण का प्रतीक माना जाता है। हर हर महादेव। 🔱 ॐ नमः शिवाय। 🕉️

Om Jai Shiv Omkara
Aarti

Om Jai Shiv Omkara

ॐ जय शिव ओंकारा आरती | Om Jai Shiv Omkara | शिव जी की आरती ॐ जय शिव ओंकारा भगवान शिव को समर्पित अत्यंत लोकप्रिय एवं भक्तिमय आरती है। इस आरती में भगवान शिव के दिव्य स्वरूप, उनकी अनंत शक्ति, त्रिमूर्ति स्वरूप, करुणा और जगत के पालन एवं संहारकर्ता रूप का गुणगान किया गया है। भक्तजन इस आरती का पाठ अथवा गायन भगवान शिव की पूजा, सोमवार, सावन, महाशिवरात्रि तथा अन्य शुभ अवसरों पर श्रद्धापूर्वक करते हैं। आरती के समय दीपक प्रज्वलित करके भगवान शिव के समक्ष आरती करना भक्ति और समर्पण का प्रतीक माना जाता है। हर हर महादेव। 🔱 ॐ नमः शिवाय। 🕉️


ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा। ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥ एकानन चतुरानन पंचानन राजे। हंसासन गरुड़ासन वृषवाहन साजे॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥ दो भुज चार चतुर्भुज दस भुज अति सोहे। त्रिगुण रूप निरखते, त्रिभुवन जन मोहे॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥ अक्षमाला वनमाला मुण्डमाला धारी। त्रिपुरारी कंसारी कर माला धारी॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥ श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे। सनकादिक गरुड़ादिक भूतादिक संगे॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥ कर के मध्य कमण्डलु, चक्र त्रिशूल धर्ता। सुखकारी दुःखहारी, जग पालनकर्ता॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥ ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका। प्रणवाक्षर में शोभित, यह तीनों एका॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥ शिव ओंकारा, शिव ओंकारा, हर ओंकारा। ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥ त्रिगुण स्वामी जी की आरती जो कोई नर गावे। कहत शिवानंद स्वामी, मनवांछित फल पावे॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥

Meaning

🌺 ॐ जय शिव ओंकारा आरती का भावार्थ ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा हे भगवान शिव! आप ही ओंकार स्वरूप परम शक्ति हैं। आपकी ही महिमा सर्वत्र व्याप्त है। हम आपके चरणों में श्रद्धापूर्वक नमन करते हैं। ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा भगवान शिव को ब्रह्मा, विष्णु और सदाशिव के एकत्व रूप में स्मरण किया गया है। भगवान शिव का अर्द्धनारीश्वर स्वरूप शिव और शक्ति की एकता का प्रतीक है। एकानन चतुरानन पंचानन राजे भगवान शिव की दिव्य सत्ता अनेक रूपों में प्रकट होती है। वे एकमुख, चतुर्मुख और पंचमुख स्वरूपों में विराजमान परम शक्ति हैं। हंसासन गरुड़ासन वृषवाहन साजे हंस ब्रह्मा जी का, गरुड़ भगवान विष्णु का और वृषभ भगवान शिव का वाहन माना जाता है। इस पंक्ति में त्रिदेव की एकता और परम सत्ता का वर्णन किया गया है। दो भुज चार चतुर्भुज दस भुज अति सोहे भगवान की शक्ति अनेक दिव्य रूपों में प्रकट होती है। उनके विभिन्न स्वरूप भक्तों को उनकी अनंत शक्ति और महिमा का स्मरण कराते हैं। त्रिगुण रूप निरखते, त्रिभुवन जन मोहे सत्त्व, रज और तम—इन तीन गुणों से बने संसार पर भगवान शिव की दिव्य सत्ता व्याप्त है। तीनों लोक उनके दिव्य स्वरूप से मोहित हैं। अक्षमाला, वनमाला, मुण्डमाला धारी भगवान शिव के विभिन्न अलंकार उनके वैराग्य, तपस्या और दिव्य स्वरूप का प्रतीक हैं। वे सांसारिक मोह से परे परम योगी हैं। श्वेताम्बर, पीताम्बर, बाघम्बर अंगे भगवान के विभिन्न दिव्य स्वरूपों और वस्त्रों का वर्णन किया गया है। बाघम्बर शिव के तपस्वी और वैरागी स्वरूप को दर्शाता है। सनकादिक, गरुड़ादिक, भूतादिक संगे भगवान शिव के साथ ऋषि-मुनि, देवगण और उनके गणों का स्मरण किया गया है। शिव सभी जीवों के कल्याणकारी और आश्रयदाता हैं। कर के मध्य कमण्डलु, चक्र त्रिशूल धर्ता भगवान शिव के हाथों में कमण्डलु और त्रिशूल जैसे दिव्य आयुध उनके योगी एवं शक्तिशाली स्वरूप को दर्शाते हैं। त्रिशूल को शिव की दिव्य शक्ति का प्रमुख प्रतीक माना जाता है। सुखकारी दुःखहारी, जग पालनकर्ता महादेव अपने भक्तों के दुःख दूर करने वाले और सुख प्रदान करने वाले माने जाते हैं। भक्त श्रद्धा और विश्वास के साथ उनकी शरण में आते हैं। ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका परम सत्य की गहराई को समझना सामान्य बुद्धि के लिए कठिन है। भगवान शिव की महिमा अनंत और अगाध है। प्रणवाक्षर में शोभित, यह तीनों एका प्रणवाक्षर 'ॐ' को परम आध्यात्मिक ध्वनि माना गया है। इस भाव में ब्रह्मा, विष्णु और शिव की एक ही परम सत्ता में एकता का स्मरण किया जाता है। त्रिगुण स्वामी जी की आरती जो कोई नर गावे जो भक्त श्रद्धा और भक्ति से भगवान शिव की आरती करता है, उसके मन में भक्ति, विश्वास और सकारात्मकता का संचार होता है।

Benefits

🔱 ॐ जय शिव ओंकारा आरती का महत्व शिव आरती भगवान शिव की उपासना का महत्वपूर्ण अंग है। आरती में दीपक की ज्योति भगवान के समक्ष घुमाकर भक्त अपने मन, कर्म और जीवन को भगवान को समर्पित करने का भाव प्रकट करता है। ॐ जय शिव ओंकारा में भगवान शिव को ओंकार स्वरूप, त्रिगुणों के स्वामी और परम शक्ति के रूप में नमन किया गया है। यह आरती विशेष रूप से: भगवान शिव की दैनिक पूजा में सोमवार के दिन सावन मास में महाशिवरात्रि के अवसर पर शिवलिंग पूजा के पश्चात मंदिर की संध्या आरती में घर में शिव पूजा के समय श्रद्धापूर्वक गाई जाती है।